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सत्य

सत्य अनन्त है , पुस्तक आदि में सीमित नहीं हो सकता ,  सत्य अपना परिचय देने में स्वयं स्वतन्त्र है  “सर्वमान्य सत्य” को देश, काल, मत, वर्ग, संप्रदाय, मजहब का भेद छू नहीं सकता है। यह विचार है, उस सन्त के जो पुस्तक[…]

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आराम करो : Take Rest !

आराम करो एक मित्र मिले, बोले, “लाला, तुम किस चक्की का खाते हो? इस डेढ़ छँटाक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो। क्या रक्खा है माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो।[…]