योग के भेद (प्रकार)

चित्त की वृत्तियों का रोकना योग है |

साधकों के भेद से योग को निम्न श्रेणियों में विभक्त किया गया है –

१. राज योग अर्थात ध्यान योग – पतंजलि योग दर्शन का मुख्य विषय राज योग अर्थात ध्यान योग है | पर अन्य सब प्रकार के योग इसके अंतर्गत हैं |

२. ज्ञान योग अर्थात सांख्य योग – सारे ज्ञेय तत्त्व का ज्ञान इस योग दर्शन में अति उत्तमता से कराया गया है |

३. कर्मयोग अर्थात अनासक्ति निष्काम कर्मयोग –

४. भक्ति योग – यह श्रद्धा , भक्ति का मुख्य अंग है , जप और मंत्र भी इसमें सम्मिलित है |

५. हठ योग – हठ योग का सम्बन्ध शरीर और प्राण से है, जो योग के आठ अंगों – यम , नियम, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि में से आसान और प्राणायाम के अंदर आ जाते हैं |

हठ योग , राज योग का साधन मात्र ही है |

‘ह’ का अर्थ सूर्य ( पिङ्गला नाड़ी अथवा प्राणवायु ) और ‘ठ’ का अर्थ चन्द्रमा ( इड़ा नाड़ी अथवा अपानवायु ) है , इनके योग को हठ योग कहते है |

६. लययोग और कुण्डलिनी योग – तो राज योग ही है |

७. मनोयोग – दृष्टि बंध ( Sightism ) , अंतरावेश ( Spiritualism ) , सम्मोहन ( Mesmerism ) और वशीकरण ( Hipnotism ) जो मनोयोग से पुकारे जाते है वे भी प्रत्याहार और धारणा के अंतर्गत है |

८. यम और नियम – न केवल व्यक्तिगत रूप से विशेषतया योगियों के लिए बल्कि सामान्यरूप से सब वर्णो , आश्रमों , मत – मतान्तरों , जातियों , देशों और समस्त मनुष्य – समाज के लिए माननीय मुख्य कर्त्तव्य तथा परम धर्म है |

 

श्रुति एवं स्मृतियों में योग का वर्णन 

01 shwetashwar upnishad adhyay 2 02 shwetashwar upnishad adhyay 2 03 kathopnishad adhyay 2 valli 3 04 Geeta Adhyay 6 05 Geeta Adhyay 6 06 Chandogya 8:6:6 kathopnishad 2:3:16

 Ashtaang Yog Bhaagwat 3 Ashtaang Yog Bhaagwat 2 Ashtaang Yog Bhaagwat 1

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