पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा अर्थात मीमांसा और वेदांत दर्शन

कर्मकाण्ड – वेदशास्त्रों में बतलायी हुई – कर्त्तव्य कर्मों अर्थात इष्ट और पूर्त्त कर्मों की – शिक्षा का नाम कर्मकाण्ड है |

 

इष्ट वे कर्म हैं, जिनकी विधि , मन्त्रों में दी गयी हो जैसे यज्ञ आदि और पूर्त्त वे सामाजिक कर्म हैं, जिनकी आज्ञा वेद में हो, किन्तु विधि लौकिक हो

 

जैसे पाठशाला , कूप , विद्यालय, अनाथालय आदि बनवाना इत्यादि |

 

इन दोनों कर्मों के तीन अवांतर भेद है –

 

(१) नित्यकर्म – जो नित्य करने योग्य हैं जैसे पंचमहायज्ञ आदि |

 

(२) नैमित्तिककर्म – वे कर्म हैं जो किसी निमित्त के होने पर किये जाएँ, जैसे पुत्र का जन्म होने पर जातकर्म – संस्कार |

 

(३) काम्यकर्म – जो किसी लौकिक अथवा पारलौकिक कामना से किय जायँ |

 

इनके अतिरिक्त कर्मों के दो और भेद हैं –

 

(४) निषिद्धकर्म – जिसके करने का शास्त्रों में निषेध हो |

 

(५) प्रायश्चित्तकर्म – जो विहित कर्म के न करने अथवा विरुद्ध कर्म के करने या वर्जित कर्म के करने से अंतः करण पर मलिन संस्कार पड़ जाते हैं , उनके धोने के लिए किये जाएँ |

 

किसी काम की सिध्दि के लिए किये गए कर्मों का फल भोगना ही पड़ेगा , तथा निषिद्ध कर्मों का आचरण अशुभ फल करेग ही |

 

अतः इनसे निवृत्ति वांछनीय हैं , परन्तु नित्यकर्म और नैमित्तिककर्म का अनुष्ठान नितांत आवश्यक हैं |

 

अतः काम्य और निषिद्ध कर्मों से निवृत्ति  परन्तु प्रायश्चित्त  तथा नित्य एवं नैमित्तिक कर्मों में प्रवृत्ति मोक्ष की साधिका हैं |

 

उपासनाकाण्ड –

 

वेदमंत्रों में बतलायी हुई लवलीनता अर्थात मन की वृत्तियों को सब ओरसे हटा कर केवल एक लक्ष्य पर ठहराने की शिक्षा का नाम उपासना हैं |

 

ज्ञानकाण्ड –

 

इसी प्रकार वेदमंत्रों में जहाँ-जहाँ आत्मा तथा परमात्मा के स्वरुप का वर्णन है , उसको ज्ञान काण्ड कहते हैं |

 

मन्त्रों के कर्मकांड का विस्तारपूर्वक वर्णन मुकयतया ब्राह्मणग्रन्थों में ,

ज्ञानकाण्ड का आरण्यकों तथा उपनिषदों में और

उपासना काण्ड का दोनों में किसी गया है |

 

मीमांसा –

 

इन तीनों कांडों के वेदार्थविषयक विचार को मीमांसा कहते हैं |

 

मीमांसा शब्द ‘मान ज्ञाने’ से जिज्ञासा अर्थ में ‘माने जिज्ञासायाम ‘ वार्त्तिक की सहायता से निष्पन्न होता है |

 

मीमांसा के दो भेद है –

 

पूर्वमीमांसा और उत्तरमीमांसा |

 

पूर्व मीमांसा में कर्मकाण्ड एंव उत्तर मीमांसा में ज्ञानकाण्ड पर विचार किया गया है |

 

उपासना दोनों में सम्मिलित हैं |

 

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