जो हम चाहते हैं, वह न हो !

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मेरा अपना अबतक का अनुभव है कि जो हम चाहते हैं, वह न हो, इसी में हमारा हित है। हमने तो जब तक अपने मन की मानी है, तब तक सिवाय पतन के, सिवाय अवनति के हमें तो कुछ परिणाम में नहीं मिला। मैं आपके सामने अपनी अनुभूति निवेदन कर रहा हूँ, और इससे लाभ उठाना चाहते हैं तो अपनी चाही मत करो। प्रभु की चाही होने दो। प्रभु वही चाहते हैं, जो अपने-आप हो रहा है।

– Swami Ji

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