Meaning of Gayatri Mantra : गायत्री मंत्र का अर्थ

Gayatri mantra002

गायत्री मंत्र 

भूर्भुवः स्वः

तत्सवितुर्वरेण्यं

भर्गो देवस्यः धीमहि

धियो यो नः प्रचोदयात्

(ॐ/ओं) यह प्रभु का मुख्य नाम है |

वह (भू:) प्राणों का प्राण

(भुवः) दुःखनाशक (स्वः) सुखस्वरूप है |

(तत्) उस (सवितुः) सकल जगत के उत्पादक (देवस्य) प्रभु के (वरेण्यं) ग्रहण करने योग्य

(भर्गः) विशुद्ध तेज को हम (धीमहि) धारण करें |

(यः) जो प्रभु (नः) हमारी (धियः) बुद्धियों को

(प्रचोदयात्) सन्मार्ग में प्रेरित करे |

Oṃ

bhūr bhuvaḥ svaḥ

tát savitúr váreṇ(i)yaṃ

bhárgo devásya dhīmahi

dhíyo yó naḥ pracodáyāt

“We meditate

on the glory of that Being

who has produced this universe;

may He enlighten our minds.”

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