“रोग” का मूलभूत कारण

शरीर में जमे हुए गन्दे तत्व (फुजला) को बाहर निकालने की कुदरती कोशिश को “रोग” कहते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा इस गन्दगी को बाहर निकालने में सहायता पहुँचाती है।

फ्रेंच वैज्ञानिक बुचार्ड ने कहा है – शरीर विष निर्माण का एक कारखाना है | ये विष हमारे शरीर से लगातार बाहर निकलते रहना चाहिए और शरीर से विष बाहर निकालने के चार रास्ते हैं
– १. सांस , २. पसीना , ३. मूत्र औए ४. मल |
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कुछ ही मिनट साँस द्वारा , २४ घंटे तक त्वचा द्वारा , ७२ घंटे तक गुर्दों द्वारा एंड १५ दिनों तक अंतड़ियों द्वारा मल शरीर से बाहर न निकले तो मनुष्य का जीना मुश्किल हो जाता है |

सब प्रकार के रोगों का मूल कारण एक सामान है , वह कि शरीर में या उसके किसी संस्थान में व्यर्थ पदार्थ जमा ( फुजला) जमा होना , जो श्वास -त्वचा-मल-मूत्र आदि द्वारा शरीर के बाहर नहीं निकाला जा सका और शरीर के ही किसी कोने में उसकी तह पर तह जमता गया है, जिसका कारण खान पान या जीवन निर्वाह ( लाइफ स्टाइल) की गलत आदतें |
जब तक शरीर-यन्त्र और उसके पुर्जे प्रबल रहते हैं , तब तक वे इस विकार को लगातार साँस – पसीने – मल -मूत्र आदि द्वारा बाहर धकेलते रहते हैं | परन्तु ज्यों ही शरीर यन्त्र में गंदा माद्दा तेजी से और इतनी अधिक मात्रा में जमा होने लगता है कि शरीर के अंगो में उतनी शक्ति नहीं रहती कि उस विकार को बाहर निकाल सके तो वह शरीर के अंदर ही जमा होने लगता है जो कि रोग का मूलभूत कारण होता है |

-” सरल प्राकृतिक चिकित्सा ” – आचार्य सत्यानन्द

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