जीने की आरजू में मरे जा रहे हैं लोग, मरने की आरजू में जिये जा रहा हूं मैं

By / June 1, 2014 / Philosophy in Films

मौत तू एक कविता है/Maut tu ek kavita hai

मौत तू एक कविता है,
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको
डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे
ज़र्द सा चेहरा लिये जब चांद उफक तक पहुचे
दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब
ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन
जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आऐ
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको

हम सब तो रंगमंच की कटपुतलियां हैं, जिसकी डोर उपरवाले की उंग्लियों में बंधी है ।

जीने की आरजू में मरे जा रहे हैं लोग, मरने की आरजू में जिये जा रहा हूं मैं

About Author

Brijesh

Leave a Reply

Back to Top
%d bloggers like this: