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सत्य

सत्य अनन्त है , पुस्तक आदि में सीमित नहीं हो सकता ,  सत्य अपना परिचय देने में स्वयं स्वतन्त्र है  यह विचार है, उस सन्त के जो पुस्तक या लेख में अपना नाम एवं फोटो छपवाने से संकोच करते थे, क्योंकि वे सत्य  की आवाज को नाम रूप आदि में आबद्ध नहीं करना चाहते थे! उन संत के सिद्धान्तानुसार उनका नाम नहीं दिया जा रहा … Continued

The Greatest things

The Best Day – Today The Greatest Sin – Fear The Best Gift – Forgiveness The Meanest Feeling – Jealousy The Most Expensive Indulgence – Hate The Greatest Trouble Maker – Talking Too Much The Greatest Teacher – One who makes … Continued

मानवता के मूल सिद्धान्त

मानवता के मूल सिद्धान्त 1. आत्म-निरीक्षण, अर्थात्‌ प्राप्त विवेक के प्रकाश में अपने दोषों को देखना । 2. की हुई भूल को पुन: न दोहराने का व्रत लेकर, सरल विश्वासपूर्वक प्रार्थना करना । 3. विचार का प्रयोग अपने पर और … Continued

छ: दर्शनोंसे निराला दर्शन

वे  महात्मा, क्या थे  महाराज ! मेरे मनसे अगर आप पूछो तो नये दार्शनिक थे!  जैसे योग है, सांख्य है, पूर्व मीमांसा है, उत्तर मीमांसा है, न्याय है, छ: दर्शन है। छ: दर्शनोंसे निराला दर्शन है उनका। इतना किसने समझा … Continued